बथुआ की खेती से किसानों को मिल सकता है अतिरिक्त आय का अवसर
सर्दियों में बथुआ उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में पसंद की जाने वाली हरी पत्तेदार सब्जी है। किसान इसे घरेलू उपयोग के साथ स्थानीय बाजार में बिक्री के लिए भी उगा सकते हैं। हालांकि, खेती से होने वाली कमाई स्थानीय मांग, उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य पर निर्भर करती है।
बथुआ की बुवाई कब करें?
उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में बथुआ की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय उपयोगी हो सकता है। सही समय किस्म, मौसम और खेती की विधि के अनुसार बदल सकता है। ICAR के अनुसार, बथुआ ठंडे मौसम की फसल है। अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए उपयुक्त रहती है।
कौन-सी उन्नत किस्में चुनें?
वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIVR) ने Kashi Bathua-2 और Kashi Bathua-4 किस्में विकसित की हैं। संस्थान की प्रकाशित जानकारी में इनकी संभावित उपज क्रमशः लगभग 31–32 और 34–36 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। वास्तविक उत्पादन खेत की परिस्थितियों और प्रबंधन पर निर्भर करेगा।

उपभोक्ताओं के लिए बथुआ क्यों उपयोगी है?
बथुआ में विटामिन A के अग्रदूत कैरोटीन, विटामिन C, फोलेट और कैल्शियम तथा आयरन जैसे खनिज पाए जाते हैं। इसे साग, रायता और अन्य व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है। संतुलित आहार में यह पोषक तत्वों की विविधता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
खरीदने और खाने की सलाह: ताजी, साफ और बिना सड़ी पत्तियां चुनें। पकाने से पहले बहते साफ पानी में अच्छी तरह धोएं।
किसानों के लिए सलाह: बुवाई से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से बीज और बुवाई के समय की पुष्टि करें। बड़े क्षेत्र में खेती करने से पहले मंडी में मांग और संभावित बिक्री मूल्य का पता लगाएं।



