उत्तर प्रदेश में कृषि उपज के प्रसंस्करण और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल और ब्लू प्लैनेट एनवायरनमेंटल सॉल्यूशंस के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान किया गया। इन प्रस्तावों से कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार और स्थानीय स्तर पर नए अवसर बनने की संभावना है।
सोया और चना प्रोटीन बनाने की योजना
एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल के साथ हुए समझौते के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सोया प्रोटीन आइसोलेट और चना प्रोटीन कन्सन्ट्रेट के उत्पादन के लिए आधुनिक विनिर्माण इकाई स्थापित करने की योजना है। इन उत्पादों का उपयोग खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में किया जाता है।
यदि परियोजना आगे बढ़ती है, तो सोयाबीन और चना जैसी फसलों की औद्योगिक मांग के अवसर बन सकते हैं। हालांकि, स्थानीय किसानों से खरीद की मात्रा, इकाई का स्थान और उत्पादन शुरू होने की तारीख अभी स्पष्ट नहीं हैं।
नोएडा और सहारनपुर में कचरा प्रसंस्करण परियोजनाएँ
ब्लू प्लैनेट एनवायरनमेंटल सॉल्यूशंस के साथ हुए समझौते में नोएडा के सेक्टर-145 में लगभग 7.5 लाख टन पुराने कचरे के उपचार तथा सहारनपुर में प्रतिदिन 350 टन क्षमता वाले ताजा कचरा प्रसंस्करण संयंत्र की योजना शामिल है।
सरकारी घोषणा में इन परियोजनाओं के लिए ₹250 करोड़ से ₹350 करोड़ के अनुमानित निवेश और 100 से 120 रोजगार अवसरों का उल्लेख है। ये आंकड़े प्रस्तावित परियोजनाओं से संबंधित है।
किसानों के लिए क्या मायने हैं?
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग कृषि उपज के मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार में योगदान दे सकते हैं। लेकिन किसानों को वास्तविक लाभ स्थानीय खरीद व्यवस्था, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और व्यावसायिक शर्तों पर निर्भर करेगा।



