उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में केले की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रहा है। जिले के कोथावां विकासखंड के मुठिया गांव के किसान भगवती प्रसाद इसका एक उदाहरण हैं। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की 27 अक्टूबर की सफलता-कथा के अनुसार, उन्होंने पारंपरिक धान-गेहूं की खेती से आगे बढ़कर टिशू कल्चर केले की खेती अपनाई।
केले की खेती के लिए मिला सरकारी अनुदान
विभागीय प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, भगवती प्रसाद ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 0.4 हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती के लिए पंजीकरण कराया था। योजना के अंतर्गत उन्हें ₹16,800 की सहायता सीधे बैंक खाते में मिलने की जानकारी दी गई है। यह राशि प्रेस नोट में उल्लिखित ₹42,000 प्रति हेक्टेयर की अनुदान दर के अनुरूप है।
एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) का उद्देश्य फल, सब्जी, मसाले और अन्य बागवानी फसलों के उत्पादन तथा उत्पादकता को बढ़ावा देना है। इसके तहत गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, नए बाग लगाने, पुरानी बागवानी फसलों के सुधार और आधुनिक खेती की तकनीकों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता दी जाती है।
किसानों के लिए क्या है सीख?
केले की खेती शुरू करने से पहले किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी, जल निकासी, सिंचाई, उपयुक्त किस्म, पौधों की गुणवत्ता और स्थानीय बाजार की मांग का आकलन करें। टिशू कल्चर पौधे विश्वसनीय स्रोत से लें और रोपाई से पहले जिला उद्यान अधिकारी या कृषि विशेषज्ञ से सलाह प्राप्त करें।
सरकारी सहायता के लिए आवेदन करने से पहले जिले में लागू अनुदान दर, पात्रता, उपलब्ध बजट और आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है। योजना का लाभ स्वतः नहीं मिलता; आवेदन और विभागीय सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।



