गेहूं की समय पर बुवाई के लिए जीरो टिलेज मशीन उपयोगी विकल्प हो सकती है। इस तकनीक में खेत की पारंपरिक जुताई किए बिना विशेष ड्रिल से बीज बोए जाते हैं। इससे जुताई के चक्कर, समय और डीजल की खपत घट सकती है। धान की कटाई के बाद बुवाई में देरी होने की आशंका हो, तो यह तकनीक विशेष रूप से काम आ सकती है।
जीरो टिलेज मशीन कब उपयोगी है?
*धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई जल्दी करनी हो।
*खेत समतल हो और मिट्टी में बुवाई के लिए पर्याप्त नमी हो।
*जुताई और खेत तैयार करने का खर्च कम करना हो।
*कम जुताई के साथ समय पर बीज बोना हो।
ICAR के अनुसार, उचित परिस्थितियों में जीरो टिलेज से समय पर बुवाई और संसाधनों की बचत में मदद मिल सकती है। हालांकि, लाभ खेत की स्थिति और प्रबंधन पर निर्भर करते हैं।
धान के अवशेष वाले खेत में कौन-सी मशीन चुनें?
यदि खेत में धान की पराली खड़ी या बिखरी हुई है, तो सामान्य जीरो टिल ड्रिल में अवशेष फंसने या बीज सही गहराई पर न पहुंचने की समस्या आ सकती है। ऐसे खेतों में अवशेषों के बीच बुवाई के लिए उपयुक्त हैप्पी सीडर या रोटरी डिस्क ड्रिल जैसी मशीन पर विचार करें। मशीन का चुनाव अवशेषों की मात्रा और खेत की स्थिति देखकर करें।
कब सावधानी जरूरी है?
बहुत गीली या जलभराव वाली जमीन में मशीन चलाने से बचें। असमतल खेत, गलत बीज गहराई और बीज-मिट्टी का खराब संपर्क अंकुरण प्रभावित कर सकते हैं। जीरो टिलेज में खरपतवार प्रबंधन भी जरूरी है, क्योंकि सभी प्रकार के खरपतवार इस तकनीक से नियंत्रित नहीं होते।
बुवाई से पहले चार काम
1. खेत की समतलता और मिट्टी की नमी जांचें।
2. मशीन की बीज-नली और बीज वितरण व्यवस्था देखें।
3. स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिश के अनुसार बीज दर और गहराई तय करें।
4. खरपतवार नियंत्रण के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।
निष्कर्ष: जीरो टिलेज मशीन समय और जुताई का खर्च घटाने में मदद कर सकती है, लेकिन सही मशीन और खेत की अनुकूल स्थिति जरूरी है। मशीन खरीदने या किराये पर लेने से पहले अपने कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।



