उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों से जुड़े संगठनों ने बकाया भुगतान, गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी और फसलों की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए हैं। अक्टूबर में लखीमपुर खीरी और बुलंदशहर में हुए प्रदर्शनों के दौरान किसानों ने अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखीं।
गोला गोकर्णनाथ में चार प्रमुख मांगों पर सत्याग्रह
लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने 15 अक्टूबर से सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में सत्याग्रह शुरू किया। संगठन ने बजाज चीनी मिल से पिछले पेराई सत्र का बकाया गन्ना भुगतान कराने और गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग की। इसके अलावा बाढ़ और अत्यधिक बारिश से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने तथा जंगली और छुट्टा पशुओं से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।
स्याना में भी मूल्य बढ़ाने की मांग
बुलंदशहर की स्याना तहसील में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं ने 16 अक्टूबर को प्रदर्शन किया। 17 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में भी किसानों की मांगों का उल्लेख किया गया। इनमें गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल करने के साथ आवारा पशुओं, बिजली और अन्य स्थानीय समस्याओं के समाधान की मांग शामिल थी।
महत्वपूर्ण तथ्य: ₹600 प्रति क्विंटल किसानों के संगठनों की मांग है, सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य नहीं। दोनों स्थानों के प्रदर्शन अलग-अलग संगठनों से जुड़े हैं।
गन्ना किसान क्या करें?
*मिल की पर्चियां, आपूर्ति रसीदें और भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
*बकाया राशि की पुष्टि संबंधित चीनी मिल या गन्ना समिति से करें।
*भुगतान में देरी होने पर लिखित शिकायत दें और उसकी रसीद रखें।
*फसल नुकसान के मुआवजे के लिए स्थानीय प्रशासन से पात्रता और आवेदन प्रक्रिया पूछें।
आगे क्या देखें? किसानों की मांगों पर संबंधित प्रशासन और गन्ना विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा भुगतान की वास्तविक स्थिति सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।



