प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों के लिए खेती की तकनीक के साथ प्रमाणन के नियम समझना भी जरूरी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान (MGIFRI), मोतिहारी, बिहार में 12 और 13 अक्टूबर 2026 को प्राकृतिक खेती तथा PGS-India प्रमाणन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
ICAR की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों, कृषि विस्तार कर्मियों, प्रगतिशील किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और ग्रामीण आजीविका से जुड़े प्रतिनिधियों सहित 27 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती की पद्धतियों, जैविक संसाधनों के उपयोग, खेत के रिकॉर्ड और प्रमाणन प्रक्रिया पर जानकारी दी गई।
PGS-India प्रमाणन क्या है?
PGS-India यानी Participatory Guarantee System भारत में जैविक उत्पादन के लिए सहभागी प्रमाणन व्यवस्था है। इसमें किसान समूह की भागीदारी, निर्धारित मानकों का पालन, खेतों का सहकर्मी मूल्यांकन और जरूरी दस्तावेजों का रखरखाव महत्वपूर्ण होता है। प्रमाणन संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर ही मिलता है।
किसान प्रमाणन की जानकारी कहाँ से लें?
प्राकृतिक खेती करने वाले किसान इन कदमों से शुरुआत कर सकते हैं:
*जिले के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन लें।
*PGS-India के आधिकारिक पोर्टल पर लागू मानक और पंजीकरण प्रक्रिया देखें।
*संबंधित क्षेत्रीय परिषद से किसान समूह बनाने, दस्तावेज जमा करने और मूल्यांकन की जानकारी लें।
*खेत में इस्तेमाल किए गए इनपुट, फसल प्रबंधन और उत्पादन का रिकॉर्ड रखें।
प्रमाणन से पहले जरूरी सावधानी
केवल प्रशिक्षण लेने से प्रमाणपत्र नहीं मिलता। किसान को लागू मानकों का पालन करके निर्धारित पंजीकरण और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। उपज को प्रमाणित जैविक बताने या उसका लेबल लगाने से पहले संबंधित नियमों की पुष्टि करें।
निष्कर्ष: प्राकृतिक खेती और PGS-India प्रमाणन की सही जानकारी किसानों को उत्पादन व्यवस्था और बाजार में उत्पाद की पहचान से जुड़े निर्णय लेने में मदद कर सकती है। आवेदन या खर्च करने से पहले आधिकारिक संस्थान से वर्तमान नियमों की पुष्टि अवश्य करें।



