कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना ने 11 अक्टूबर 2026 को अपना पहला वर्ष पूरा कर लिया। केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत 11 अक्टूबर 2025 को की थी। इसका उद्देश्य कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम कृषि ऋण वाले 100 चयनित जिलों में खेती से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य
इस छह वर्षीय योजना के लिए सालाना ₹24,000 करोड़ के परिव्यय का प्रावधान है। इसके तहत 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं का समन्वय किया जा रहा है। राज्य सरकारों की योजनाओं और स्थानीय स्तर पर निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी शामिल किया जा सकता है।
मुख्य प्राथमिकताएं हैं:
*कृषि उत्पादकता में सुधार।
*फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा।
*पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण सुविधाओं का विकास।
*सिंचाई सुविधाओं में सुधार।
*किसानों के लिए अल्पकालीन और दीर्घकालीन कृषि ऋण की उपलब्धता बेहतर करना।
किसानों को क्या लाभ मिल सकता है?
चयनित जिलों की स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास योजनाएं तैयार की जाती हैं। इससे सिंचाई, भंडारण और कृषि सुविधाओं में सुधार की संभावना है। हालांकि, यह सभी किसानों को सीधे एक निश्चित नकद राशि देने वाली योजना नहीं है। लाभ संबंधित गतिविधियों और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
किसान जानकारी कहां लें?
किसान अपने जिला कृषि विभाग या जिला प्रशासन से संपर्क कर पता करें कि उनके जिले में कौन-सी गतिविधियां लागू हैं। किसी एजेंट को भुगतान करने से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देशों की पुष्टि करें।
निष्कर्ष: योजना का उद्देश्य कृषि सुविधाओं को मजबूत करना है। किसान अपने जिले की कार्ययोजना की जानकारी लेकर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की तैयारी कर सकते हैं।



