कम बारिश वाले क्षेत्रों में ऐसी फसलों का चुनाव महत्वपूर्ण है, जो सीमित नमी और गर्म मौसम को सहन कर सकें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 9 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया कि 220 मिमी बारिश की स्थिति में भी मोठ की फसल से उत्पादन मिला। यह उदाहरण वर्षा आधारित खेती में उपयुक्त फसलों और बेहतर कृषि प्रबंधन की अहमियत बताता है।
मोठ की खेती कम बारिश में क्यों उपयोगी है?
मोठ एक दलहनी फसल है, जिसे अंग्रेजी में Moth Bean कहा जाता है। ICAR के अनुसार, यह फसल शुष्क और वर्षा आधारित क्षेत्रों के अनुकूल मानी जाती है। हालांकि, कम बारिश में उत्पादन मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर क्षेत्र में समान उपज प्राप्त होगी।
किसान किन बातों का रखें ध्यान?
उपयुक्त किस्म चुनें: अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार कृषि विशेषज्ञों की अनुशंसित किस्म का चयन करें।
बुवाई का समय तय करें: स्थानीय मानसून और मिट्टी में उपलब्ध नमी के आधार पर बुवाई करें।
नमी का संरक्षण करें: खेत में खरपतवार नियंत्रित रखें और मिट्टी की नमी बचाने वाली स्थानीय रूप से उपयुक्त तकनीक अपनाएं।
फसल विविधीकरण पर विचार करें: जहां परिस्थितियां अनुकूल हों, वहां मोठ जैसी दलहनी फसल को खेती की योजना में शामिल किया जा सकता है।
लागत और बाजार देखें: बीज, श्रम और अन्य खर्चों के साथ स्थानीय बाजार में दाल की मांग का आकलन करें।
क्या हर जगह समान उत्पादन मिलेगा?
नहीं। बारिश की कुल मात्रा के साथ उसका वितरण, मिट्टी, बीज की किस्म, तापमान और फसल प्रबंधन भी उपज को प्रभावित करते हैं। इसलिए केवल 220 मिमी बारिश के उदाहरण के आधार पर उत्पादन या मुनाफे का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।
निष्कर्ष: मोठ सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती का एक विकल्प हो सकती है। किसान बुवाई से पहले नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सलाह लें।



