सेलेरी (Celery), जिसका वैज्ञानिक नाम Apium graveolens है, एक सुगंधित सब्जी और मसाला फसल है। भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से बीज उत्पादन के लिए भी की जाती है। इसकी पत्तियां और डंठल सलाद तथा पकवानों में इस्तेमाल होते हैं, जबकि सूखे बीज स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। किसान इसकी खेती से पहले स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग का आकलन करें।
सेलेरी की खेती के लिए कैसी मिट्टी चाहिए?
सेलेरी के लिए उपजाऊ, पर्याप्त जैविक पदार्थ वाली और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त रहती है। खेत में पानी जमा होने से फसल को नुकसान हो सकता है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार उत्तर भारत में नर्सरी तैयार करने के लिए सामान्यतः 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक का समय उपयुक्त माना गया है। क्षेत्र और मौसम के अनुसार समय में बदलाव संभव है।
बीज छोटे होते हैं, इसलिए नर्सरी में बुवाई सावधानी से करें। पौधों को नियमित नमी दें, लेकिन पानी जमा न होने दें। पौध तैयार होने पर स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार रोपाई करें।
उपभोक्ता सेलेरी का इस्तेमाल कैसे करें?
*सलाद: ताजी पत्तियां और डंठल सलाद में मिलाए जा सकते हैं।
*सूप और सब्जियां: इसका स्वाद सूप, स्ट्यू और पकाई गई सब्जियों में उपयोगी होता है।
*मसाले: सूखे बीज कुछ खाद्य पदार्थों और सॉस में स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
*पोषण: सेलेरी में फाइबर और विटामिन K व C सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।
किसानों के लिए बाजार की संभावना
सेलेरी की बिक्री ताजी सब्जी और बीज के रूप में हो सकती है। हालांकि, बाजार और खरीदारों की मांग क्षेत्र के अनुसार अलग होती है। बुवाई से पहले स्थानीय व्यापारियों, मसाला कारोबारियों और सब्जी विक्रेताओं से संपर्क करें।
जरूरी अंतर: सेलेरी और सामान्य मसाले वाली अजवाइन अलग पौधे हैं। बीज खरीदते समय वैज्ञानिक नाम Apium graveolens की पुष्टि करें।



