उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के पुराने भुगतान पर ब्याज से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 2012 से 2015 के बीच गन्ना मूल्य भुगतान में देरी के कारण चीनी मिलों पर करीब ₹2,000 करोड़ के ब्याज बकाये का उल्लेख किया गया था। यह मामला पुराने भुगतान और ब्याज माफी से जुड़े कानूनी विवाद का हिस्सा है।
क्या है पुराने गन्ना बकाये का मामला?
पुराने गन्ना भुगतान पर ब्याज माफी के फैसले को किसान संगठनों ने अदालत में चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस विषय पर हुई सुनवाई में देरी से भुगतान और ब्याज की देनदारी से जुड़े सवाल उठे। वर्ष 2017 में अदालत ने ब्याज माफी से संबंधित फैसले को निरस्त किया था। इसके बाद ब्याज की गणना और वसूली को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।
सितंबर 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विभिन्न रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत करीब ₹1,936 करोड़ की बकाया राशि की वसूली के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए। रिपोर्ट में ब्याज दर और वसूली की गणना से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख था।
क्या सभी किसानों को मिलेगा पैसा?
किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि ₹2,000 करोड़ का आंकड़ा सभी गन्ना किसानों के लिए नई सहायता राशि की घोषणा नहीं है। भुगतान की पात्रता संबंधित बकाये, चीनी मिल, किसान के दावे और लागू न्यायिक आदेशों पर निर्भर करेगी।
किसान कहां से लें जानकारी?
किसान अपने पुराने भुगतान का रिकॉर्ड संबंधित गन्ना समिति, चीनी मिल या जिला गन्ना अधिकारी से प्राप्त करें। किसी भुगतान की पुष्टि के लिए आधिकारिक विभागीय सूचना और अदालत के आदेश देखें।
ध्यान दें: यह मामला पुराने बकाये और ब्याज की वसूली से संबंधित है; व्यक्तिगत भुगतान की स्थिति की अलग से पुष्टि जरूरी है।



