धान की कटाई के बाद बची पराली किसानों के लिए चुनौती बन सकती है। इसे जलाने के बजाय मशीनों की मदद से खेत में मिलाना, सतह पर बिछाना या एकत्र करके उपयोगी गतिविधियों से जोड़ना विकल्प हो सकता है। सरकार भी फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनरी, कस्टम हायरिंग सेंटर और supply chain को बढ़ावा दे रही है।
कौन-सी मशीनें उपयोगी हैं?
खेत और फसल अवशेष की स्थिति के अनुसार स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर, मल्चर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रेक और बेलर जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ मशीनें अवशेष को खेत में मिलाने में मदद करती हैं, जबकि बेलर और रेक पराली को एकत्र करने में उपयोगी हो सकते हैं। मशीन का चुनाव खेत की स्थिति और अगली फसल की जरूरत के अनुसार करना चाहिए।
पराली से कमाई का रास्ता कैसे बन सकता है?
एकत्र की गई पराली को biomass, pellet, CBG और अन्य औद्योगिक उपयोगों वाली supply chain से जोड़ा जा सकता है। लेकिन इसके लिए स्थानीय खरीदार, संग्रहण, परिवहन और नियमित उठान की व्यवस्था जरूरी है। इसलिए पराली को बेचने से पहले बाजार और भुगतान की शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है।
मशीन खरीदना जरूरी नहीं
छोटे किसान हर मशीन खरीदने के बजाय Custom Hiring Centre (CHC) से किराये पर मशीन लेने का विकल्प देख सकते हैं। SMAM के तहत कृषि मशीनरी की खरीद और CHC स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता के प्रावधान हैं। वास्तविक सहायता मशीन, परियोजना, राज्य और पात्रता के अनुसार अलग हो सकती है।
किसान इन बातों का रखें ध्यान
मशीन लेने से पहले खेत का क्षेत्रफल, पराली की मात्रा, अगली फसल और उपलब्ध सेवा केंद्र देखें। अगर पराली बाहर भेजनी है तो खरीदार, परिवहन लागत, भंडारण और उठान की व्यवस्था पहले तय करें।
पराली को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक प्रबंधन किसान के लिए लागत बचाने और कृषि अवशेष को उपयोगी संसाधन में बदलने का अवसर दे सकता है।



