भारत की देसी पशु नस्लों के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार के लिए आधुनिक प्रजनन तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। उत्तराखंड की बद्री गाय के संरक्षण से जुड़े शोध में भी OPU-IVF जैसी उन्नत तकनीकों पर काम किया जा रहा है। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार, संस्थान में अभिजात्य बद्री गायों के संरक्षण के लिए OPU-IVF और क्लोनिंग जैसी तकनीकों पर अनुसंधान किया जा रहा है।
OPU-IVF तकनीक क्या है?
OPU यानी Ovum Pick-Up में जीवित मादा पशु से विशेषज्ञों की मदद से अंडाणु प्राप्त किए जाते हैं। इसके बाद प्रयोगशाला में इन अंडाणुओं को परिपक्व कर शुक्राणु से निषेचित किया जाता है। विकसित भ्रूण को उपयुक्त दूसरी मादा पशु में स्थानांतरित किया जा सकता है।
ICAR के अनुसार OPU तकनीक से ज्ञात वंशावली वाले जीवित पशुओं से बार-बार अंडाणु प्राप्त किए जा सकते हैं, जिससे आनुवंशिक सुधार के कार्यक्रमों में इसका उपयोग संभव होता है।
बद्री गाय के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
बद्री उत्तराखंड की पहाड़ी परिस्थितियों में पाई जाने वाली देशी नस्ल है और इसे स्थानीय जलवायु के अनुकूल माना जाता है। इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकें उपयोगी हो सकती हैं, खासकर तब जब चयनित और बेहतर आनुवंशिक गुण वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य हो।
किसानों को क्या समझना चाहिए?
OPU-IVF सामान्य पशुपालक की रोजमर्रा की पशुपालन प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ, प्रयोगशाला सुविधाएं, उपयुक्त पशु और निर्धारित प्रजनन कार्यक्रम जरूरी होते हैं। इसलिए किसान ऐसी तकनीक अपनाने से पहले पशु चिकित्सा विशेषज्ञ या संबंधित सरकारी संस्थान से जानकारी लें।
भविष्य में ऐसी तकनीकें देशी नस्लों के जर्मप्लाज्म संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और चयनित पशुओं के गुणन में भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि किसी तकनीक से दूध उत्पादन या आर्थिक लाभ की निश्चित गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए।



