औषधीय फसलों की खेती में शतावरी (Asparagus racemosus) किसानों के लिए एक विकल्प बन रही है। इसकी मुख्य उपयोगी उपज जमीन के अंदर बनने वाली जड़ें हैं। यह पौधा उत्तर प्रदेश के मैदानी और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है। RLB Central Agricultural University, Jhansi ने बुंदेलखंड क्षेत्र में शतावरी की खेती को लेकर कृषि संबंधी जानकारी साझा की है।
कैसी जमीन और मौसम चाहिए?
शतावरी को ऐसी जमीन पसंद है जहां जल निकासी अच्छी हो और पानी लंबे समय तक जमा न रहे। हल्की, बलुई या बलुई-दोमट मिट्टी जड़ों के विकास के लिए उपयुक्त मानी जाती है। शोध में लगभग pH 6 से 7 को अच्छा बताया गया है, हालांकि पौधा कुछ अधिक pH वाली मिट्टी में भी उग सकता है।
गर्म और उपोष्ण जलवायु इसके लिए अनुकूल रहती है। बुंदेलखंड जैसे अपेक्षाकृत शुष्क क्षेत्रों में भी इसकी खेती पर काम किया गया है।
खेती की शुरुआत कैसे करें?
खेत की अच्छी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा करें और सड़ी हुई गोबर खाद या जैविक खाद मिलाएं। शतावरी को बीज से नर्सरी तैयार करके खेत में लगाया जा सकता है। RLBCAU की जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में अगस्त के आसपास बीज की बुआई और बाद में तैयार पौधों की रोपाई की सलाह दी गई है।
रोपाई के दौरान पर्याप्त दूरी रखना जरूरी है, ताकि जमीन के अंदर जड़ों को फैलने के लिए जगह मिल सके।
सिंचाई और खेत की देखभाल
शतावरी में जलभराव सबसे बड़ी सावधानियों में से एक है। खेत में पानी निकलने की उचित व्यवस्था रखें। शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि खरपतवार पौधे की बढ़वार और पोषक तत्वों पर असर डाल सकते हैं।
समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें और पौधों की बढ़वार के अनुसार सिंचाई करें। जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचें।
शतावरी में कौन-से रोग आ सकते हैं?
शतावरी में खराब जल निकासी और संक्रमित रोपण सामग्री के कारण जड़ या क्राउन सड़न जैसी समस्या हो सकती है। संबंधित फसल सुरक्षा स्रोतों में फ्यूजेरियम से जुड़ी जड़/क्राउन सड़न का उल्लेख मिलता है।
बचाव के आसान तरीके
*खेत में पानी जमा न होने दें।
*स्वस्थ और रोगमुक्त पौध सामग्री का इस्तेमाल करें।
*संक्रमित पौधों को खेत में न रहने दें।
*खेत में पौध अवशेष और खरपतवार की सफाई रखें।
*एक ही खेत में लगातार एक जैसी फसल लेने से बचें।
*किसी रासायनिक दवा का इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।
कब करें खुदाई और बिक्री?
शतावरी की जड़ों की खुदाई फसल की बढ़वार, क्षेत्र और खेती की पद्धति के अनुसार अलग समय पर हो सकती है। इसलिए केवल किसी निश्चित महीने को आधार बनाकर खुदाई न करें। जब पौधे और जड़ें पर्याप्त विकसित हो जाएं, तब स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार खुदाई करें।
खुदाई के बाद जड़ों को साफ करके निर्धारित तरीके से सुखाया जाता है। गुणवत्ता, नमी और साफ-सफाई बाजार भाव को प्रभावित कर सकती है।
शतावरी कहां बेच सकते हैं?
इसकी जड़ों की मांग औषधीय और हर्बल क्षेत्र में होती है। उत्तर प्रदेश में RLBCAU की जानकारी में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और दिल्ली की मंडियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि वास्तविक खरीददार और भाव समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए बुवाई से पहले स्थानीय व्यापारी, औषधीय पौधों के खरीदार या प्रोसेसर से बाजार की जानकारी लेना बेहतर है।
किसान के लिए सबसे जरूरी बात
शतावरी को केवल यह देखकर न लगाएं कि बाजार में इसका भाव अच्छा बताया जा रहा है। यह औषधीय फसल है और खरीदार, गुणवत्ता तथा उत्पादन अवधि के अनुसार आमदनी बदल सकती है। इसलिए खेती शुरू करने से पहले प्रमाणित रोपण सामग्री, स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और संभावित खरीदार की जानकारी जरूर जुटाएं।



