Fisheries Farming Opportunity 2026
खेती के साथ दूसरी कृषि गतिविधियां जोड़ना किसानों के लिए आय के स्रोतों में विविधता लाने का एक विकल्प हो सकता है। मछली पालन (Fish Farming) भी ऐसी ही गतिविधि है, जिसे उपलब्ध तालाब, पानी, बाजार और स्थानीय तकनीकी सुविधाओं के आधार पर अपनाया जा सकता है।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के माध्यम से मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में उत्पादन, तकनीक, बुनियादी ढांचे और बाजार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
2026-27 में मछली पालन क्षेत्र के लिए क्या खास है?
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में PMMSY के लिए ₹2,500 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है। वहीं, पूरे fisheries sector के लिए कुल वार्षिक बजटीय सहायता ₹2,761.80 करोड़ बताई गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में मछली उत्पादन 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुंच गया। इससे मत्स्य पालन और aquaculture से जुड़े व्यवसायों की बढ़ती आर्थिक भूमिका का पता चलता है।
छोटे किसान मछली पालन शुरू करने से पहले क्या देखें?
मछली पालन शुरू करने से पहले इन बातों की जांच जरूरी है—
*तालाब का आकार और पानी की उपलब्धता।
*पानी की गुणवत्ता और तालाब की स्थिति।
*क्षेत्र के लिए उपयुक्त मछली प्रजाति।
*बीज और चारे की लागत।
*स्थानीय बाजार और खरीदारों की उपलब्धता।
*तकनीकी प्रशिक्षण और विभागीय सहायता।
*बीमारी और पानी की गुणवत्ता प्रबंधन की व्यवस्था।
केवल बाजार में मछली का भाव देखकर निवेश करना उचित नहीं है। मछली पालन में पानी की गुणवत्ता, मछली की stocking density, चारा प्रबंधन और रोग नियंत्रण सीधे उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।
खेती के साथ कैसे जोड़ें मछली पालन?
जहां परिस्थितियां अनुकूल हों, वहां किसान खेती के साथ मछली पालन या अन्य integrated farming activities पर विचार कर सकते हैं। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की संभावना बन सकती है। हालांकि हर खेत और तालाब की परिस्थितियां अलग होती हैं।
किसान के लिए जरूरी सलाह
मछली पालन शुरू करने से पहले नजदीकी मत्स्य विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या संबंधित विशेषज्ञ से प्रशिक्षण और स्थानीय तकनीकी सलाह लें। साथ ही PMMSY के तहत अपने राज्य में उपलब्ध गतिविधियों और पात्रता की जानकारी प्राप्त करें।
निष्कर्ष: मछली पालन किसानों के लिए कृषि के साथ आय में विविधता लाने का एक विकल्प हो सकता है। लेकिन निवेश से पहले पानी, तालाब, बाजार, लागत और तकनीकी सहायता का स्थानीय स्तर पर आकलन करना जरूरी है।



