फल, सब्जी और फूलों की फसलों में कीट और रोग उत्पादन के साथ फलों व सब्जियों की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में किसान हर समस्या के लिए तुरंत रासायनिक दवा का छिड़काव करने के बजाय एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management- IPM) अपना सकते हैं। इसमें खेत की निगरानी से लेकर जरूरत के अनुसार जैविक, यांत्रिक और रासायनिक उपायों का इस्तेमाल किया जाता है।
सबसे पहले फसल की नियमित निगरानी करें
किसान सप्ताह में कई बार पौधों और पत्तियों की जांच करें। पत्तियों में छेद या धब्बे, पत्तियों का मुड़ना, कीटों की मौजूदगी, चिपचिपा पदार्थ या फलों पर असामान्य निशान दिखाई दें तो समस्या की पहचान करना जरूरी है।
स्वस्थ पौधों से करें शुरुआत
अच्छी गुणवत्ता वाले बीज या स्वस्थ पौध का चुनाव, खेत की साफ-सफाई, संतुलित पोषण और उचित सिंचाई से फसल को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है। रोगग्रस्त पौधों या प्रभावित हिस्सों को जरूरत के अनुसार हटाना भी उपयोगी हो सकता है।
जरूरत के अनुसार गैर-रासायनिक उपाय अपनाएं
कीट की स्थिति के अनुसार हाथ से प्रभावित हिस्से हटाना, ट्रैप, खेत की सफाई और अन्य उपयुक्त जैविक या यांत्रिक उपाय अपनाए जा सकते हैं। उपाय का चुनाव फसल और कीट की पहचान के आधार पर करना चाहिए।
दवा का इस्तेमाल हो तो इन बातों का रखें ध्यान
रासायनिक pesticide की आवश्यकता होने पर फसल के लिए पंजीकृत/अनुमोदित उत्पाद का ही उपयोग करें। लेबल पर दी गई मात्रा, सुरक्षा निर्देश और फसल कटाई से पहले निर्धारित अंतराल का पालन करें। बिना पहचान के दवा का छिड़काव या निर्धारित मात्रा से अधिक प्रयोग करने से बचें।
एकीकृत कीट प्रबंधन का उद्देश्य हर कीट को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि फसल को आर्थिक नुकसान से बचाते हुए कीटों का व्यवस्थित प्रबंधन करना है। किसान अपने क्षेत्र और फसल के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर IPM अपनाएं।



