खेती में अब फसल उत्पादन के साथ मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर बढ़ रहा है। इसी दिशा में Soil Carbon Credit किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक उभरता अवसर है। इसमें ऐसी खेती को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे मिट्टी में कार्बन का भंडारण बढ़ाने या खेती से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
Soil Carbon Credit क्या है?
कम जुताई, फसल अवशेष प्रबंधन, Direct Seeded Rice (DSR), पानी की बेहतर उपयोग क्षमता और विविध फसल प्रणाली जैसी पद्धतियां अपनाने पर परियोजना के तहत उनके पर्यावरणीय प्रभावों का मापन किया जा सकता है। तय मानकों के अनुसार सत्यापन होने पर Carbon Credits जारी हो सकते हैं। इन क्रेडिट से मिलने वाले राजस्व में परियोजना की शर्तों के अनुसार किसानों को हिस्सा मिल सकता है।
2,550 किसानों को मिला भुगतान
17 सितंबर 2026 को PIB ने बताया कि पंजाब और हरियाणा के 2,550 किसानों के लिए Soil Carbon से जुड़े कार्यक्रम में DBT भुगतान शुरू किया गया। शुरुआती चरण में लगभग 30,000 एकड़ से जुड़े 50,000 से अधिक Carbon Credits जारी हुए और किसानों को करीब ₹3,000 से ₹15,000 तक भुगतान मिला। यह राशि सभी किसानों के लिए समान या निश्चित नहीं है।
BRICS और उत्तर प्रदेश में भी पहल
12–13 जून 2026 को इंदौर में भारत की अध्यक्षता में हुई 16वीं BRICS Agriculture Ministers’ Meeting में Agroecology और Regenerative Agriculture के लिए BRICS Network of Centres of Excellence स्थापित करने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य शोध, तकनीकी सहयोग और जलवायु-सहनीय खेती को बढ़ावा देना है; यह किसानों को सीधे भुगतान देने वाली योजना नहीं है।
उत्तर प्रदेश में IIT Roorkee की पहल को कृषि विभाग की मंजूरी मिली है। शुरुआती कार्यक्रम सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली में प्रस्तावित है, जिसमें टिकाऊ खेती, मृदा स्वास्थ्य तथा Carbon Credit के लिए मापन-वेरिफिकेशन पर काम किया जाएगा।
किसान क्या सावधानी रखें?
किसी Carbon Credit कार्यक्रम से जुड़ने से पहले किसान मानक, अनुबंध, भुगतान का आधार, निगरानी प्रक्रिया, परियोजना की अवधि और किसी भी शुल्क की जानकारी जरूर लें। केवल बड़े भुगतान के दावे पर भरोसा न करें।
निष्कर्ष
Soil Carbon Credit किसानों के लिए अतिरिक्त आय का संभावित नया माध्यम है। हालांकि भुगतान परियोजना, सत्यापन और Carbon Credits पर निर्भर करता है। इसलिए पारदर्शी और सत्यापित कार्यक्रम से जुड़ना ही जरूरी है।



