किसान आमतौर पर अपनी उपज खेत से सीधे मंडी या व्यापारी को बेच देते हैं। लेकिन फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए वही कृषि उपज अलग रूप में तैयार करके बाजार तक पहुंचाई जा सकती है। इससे किसान के लिए आय के अतिरिक्त अवसर बन सकते हैं और खराब होने वाली उपज को संभालने में भी मदद मिल सकती है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय भी कृषि उपज में मूल्य संवर्धन और नुकसान कम करने को इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताता है।
पहले समझें Primary Processing
प्राथमिक प्रसंस्करण में उपज को बाजार या आगे की प्रोसेसिंग के लिए तैयार किया जाता है। जैसे गेहूं की सफाई और ग्रेडिंग, दाल की मिलिंग, मिर्च की सफाई-सुखाई, फल-सब्जियों की छंटाई, धुलाई, कटाई या सुखाना। इसके लिए किसान छोटे स्तर पर सफाई, ग्रेडिंग, सुखाने और पैकिंग की व्यवस्था विकसित कर सकते हैं।
Secondary Processing से बढ़ सकता है मूल्य
इसके अगले स्तर पर उपज से तैयार खाद्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए टमाटर से सॉस, आम से अचार या पल्प, मिर्च से पाउडर, आंवला से कैंडी, गेहूं से आटा या मिलेट से तैयार खाद्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं। Primary और secondary processing की परिभाषाओं में इसी तरह कच्ची उपज को आगे उपयोगी और अधिक मूल्य वाले उत्पाद में बदलना शामिल है।
किसान कैसे शुरू करें?
किसान पहले अपने क्षेत्र की ऐसी उपज चुनें जिसकी स्थानीय मांग हो। शुरुआत छोटे स्तर से करें और कच्चा माल, मशीन, बिजली, पैकेजिंग, श्रम, परिवहन और बिक्री की लागत का हिसाब रखें। अकेले निवेश करने के बजाय FPO, SHG या किसान समूह के साथ साझा सुविधा विकसित करने का विकल्प भी देखा जा सकता है। MoFPI की योजनाओं में FPO, SHG और अन्य संस्थाओं के लिए food processing से जुड़ी सहायता के प्रावधान मौजूद हैं।
निष्कर्ष
किसान के लिए फूड प्रोसेसिंग का मतलब केवल बड़ी फैक्ट्री लगाना नहीं है। सफाई → ग्रेडिंग → सुखाना → पैकिंग → तैयार उत्पाद जैसे छोटे कदमों से भी value addition की शुरुआत की जा सकती है। हालांकि किसी भी उत्पाद को बाजार में बेचने से पहले खाद्य सुरक्षा, पैकेजिंग, लेबलिंग और लागू नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।



