गन्ना उत्तर प्रदेश की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है। इसकी खेती में किसान ट्रेंच विधि अपनाकर शुरुआती खाली जगह का उपयोग सहफसल के लिए कर सकते हैं। इससे मुख्य गन्ने के साथ अतिरिक्त उत्पादन और आय का अवसर बन सकता है।
गन्ने की बुवाई का सही समय
उत्तर प्रदेश में गन्ने की मुख्य बुवाई सामान्यतः शरदकालीन और वसंतकालीन मौसम में होती है। शरदकालीन गन्ने की बुवाई सितंबर-अक्टूबर, जबकि वसंतकालीन गन्ने की बुवाई लगभग फरवरी-मार्च में की जाती है। ट्रेंच विधि और सहफसल के लिए सितंबर के अंत से अक्टूबर का समय कई क्षेत्रों में उपयोगी माना जाता है। हालांकि सही तारीख गन्ने की किस्म, क्षेत्र, मिट्टी और स्थानीय कृषि सलाह पर निर्भर करती है।
ट्रेंच विधि से कैसे लगाएं गन्ना?
खेत की अच्छी जुताई और समतलीकरण के बाद लगभग 25-30 सेमी गहरी नालियां तैयार की जाती हैं। नालियों के बीच उचित दूरी रखते हुए स्वस्थ और रोगमुक्त गन्ने के बीज टुकड़ों को उपचारित करके लगाया जाता है। इसके बाद हल्की मिट्टी डालकर आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। खेत में जलभराव न होने दें और खरपतवार की समय पर निराई-गुड़ाई करें।
सहफसल से अतिरिक्त कमाई
गन्ने की शुरुआती बढ़वार के दौरान किसान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आलू, मटर, चना, प्याज, लहसुन या धनिया जैसी सहफसलें ले सकते हैं। इससे गन्ने की कटाई से पहले खेत से दूसरी उपज प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
रोग-कीट और कटाई
फसल में कीट या रोग के लक्षण दिखने पर समय पर पहचान कर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें। अनावश्यक दवाओं का प्रयोग न करें। गन्ना सामान्यतः 10-15 महीने में क्षेत्र और किस्म के अनुसार तैयार होता है। सही समय पर कटाई और साफ-सफाई से उपज की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।



