प्रयागराज में किसानों को खेत की मिट्टी की स्थिति समझने और खाद के बेहतर प्रबंधन में मदद देने के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जिले में अब तक 77,800 सॉइल हेल्थ कार्ड तैयार किए गए हैं। यह आँकड़ा प्रयागराज जिले से संबंधित है, पूरे उत्तर प्रदेश का नहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में 23,000, वर्ष 2025 में 46,000 और चालू खरीफ सीजन में 8,800 कार्ड तैयार किए गए। इन कार्डों का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की स्थिति के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लेने में मदद देना है।
सॉइल हेल्थ कार्ड में क्या जानकारी मिलती है?
सॉइल हेल्थ कार्ड मिट्टी की जाँच पर आधारित रिपोर्ट होती है। इसमें मिट्टी के पोषक तत्वों और अन्य गुणों की जानकारी दी जाती है। इसके प्रमुख मानकों में मिट्टी का पीएच, ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर और जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज तथा बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल हैं। इसके आधार पर खाद और मिट्टी सुधार से जुड़ी सिफारिशें मिल सकती हैं।
किसानों को क्या फायदा होगा?
मिट्टी की जाँच से किसान यह समझ सकते हैं कि खेत में किन पोषक तत्वों की कमी या अधिकता है। इससे जरूरत के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल करने और बिना आवश्यकता खाद डालने से बचने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ खेत की स्थिति, फसल और सिफारिशों के सही पालन पर निर्भर करता है।
किसान मिट्टी की जाँच कैसे कराएँ?
किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग, मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से मिट्टी का नमूना लेने और जाँच कराने की प्रक्रिया पूछ सकते हैं। नमूना सही तरीके से एकत्र करना जरूरी है, क्योंकि गलत नमूने से रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट मिलने के बाद खाद की मात्रा तय करते समय फसल, खेत की स्थिति और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखें।
किसानों के लिए जरूरी बात: सॉइल हेल्थ कार्ड को केवल दस्तावेज न समझें। मिट्टी की जाँच के नतीजों के आधार पर संतुलित खाद प्रबंधन की योजना बनाएँ। इससे खेती की लागत को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
स्रोत: भारत सरकार का सॉइल हेल्थ कार्ड कार्यक्रम तथा प्रयागराज में कार्ड जारी होने से संबंधित मीडिया रिपोर्टें।



