रबी मक्का उत्तर प्रदेश के उन किसानों के लिए एक विकल्प है जिनके पास सिंचाई की सुविधा और फसल बेचने के लिए उपयुक्त बाजार उपलब्ध है। बेहतर परिणाम के लिए बुवाई का समय, क्षेत्र के अनुकूल किस्म और सिंचाई प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। उत्पादन और मुनाफा मौसम, खेत तथा कृषि प्रबंधन के अनुसार बदल सकते हैं।
रबी मक्का की बुवाई कब करें?
उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में रबी मक्का की बुवाई अक्टूबर के अंत से नवंबर के दौरान की जाती है। हालांकि, सही समय जिले, तापमान और सिंचाई की उपलब्धता पर निर्भर करता है। किसान बुवाई से पहले अपने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से स्थानीय सलाह लें।
उत्तर प्रदेश के लिए कौन-सी किस्में हैं?
भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR) की प्रकाशित जानकारी के अनुसार:
IMH 230: पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में सिंचित रबी खेती के लिए अनुशंसित।
IMH 225: पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कुछ क्षेत्रों में सिंचित रबी खेती के लिए अनुशंसित।
इन किस्मों की अवधि और संभावित उपज क्षेत्र तथा प्रबंधन के अनुसार बदल सकती है। बीज खरीदते समय प्रमाणित बीज और अपने जिले के लिए नवीनतम अनुशंसा की पुष्टि करें।
खेत की तैयारी और सिंचाई
खेत में जल निकासी की व्यवस्था रखें। बीज की मात्रा, पौधों की दूरी और उर्वरक की खुराक स्थानीय कृषि सलाह तथा मिट्टी की स्थिति के अनुसार तय करें। फसल की शुरुआती बढ़वार और फूल आने के समय नमी की कमी से बचना महत्वपूर्ण है। खरपतवार, कीट या रोग दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
बिक्री से पहले लागत का हिसाब लगाएं
बुवाई से पहले स्थानीय मंडी, मक्का खरीदारों और पशु आहार इकाइयों से मांग तथा खरीद की शर्तें पता करें। बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, कटाई और परिवहन का खर्च जोड़कर संभावित आमदनी का आकलन करें।
किसानों के लिए सलाह: बड़े क्षेत्र में बुवाई करने से पहले स्थानीय KVK से किस्म, बुवाई समय और सिंचाई संबंधी सिफारिश की पुष्टि जरूर करें।



