प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोवा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-CCARI) ने 23 अक्टूबर को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। ये कार्यक्रम ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत डिवर गांव और संस्थान परिसर में हुए। इनका उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना, रासायनिक कृषि आदानों पर निर्भरता कम करने के विकल्पों की जानकारी देना और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करना था।
किसानों को किन तरीकों की जानकारी दी गई?
डिवर गांव में किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती के सिद्धांतों तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग के बारे में बताया गया। चर्चा में जैविक खाद, जैविक कृषि आदान और पर्यावरण-अनुकूल फसल प्रबंधन जैसे विषय शामिल रहे।
दूसरा कार्यक्रम ICAR-CCARI परिसर में हुआ, जिसमें गोवा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और दक्षिण गोवा के बाली गांव के किसान शामिल हुए। कार्यक्रम में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और टिकाऊ खाद्य उत्पादन के महत्व पर जानकारी दी गई।
किसान अपने खेत में क्या कर सकते हैं?
किसान सबसे पहले मिट्टी की जांच कराएं और रिपोर्ट के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करें। उपलब्ध फसल अवशेषों का उचित उपयोग, अच्छी तरह सड़ी कम्पोस्ट खाद और फसल चक्र अपनाने जैसे उपाय मिट्टी की देखभाल में मदद कर सकते हैं। जैविक या प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने से पहले अपनी फसल, मिट्टी और सिंचाई की स्थिति के अनुसार कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
खेती की पद्धति बदलने से लागत और उत्पादन पर असर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसान पहले छोटे क्षेत्र में प्रयोग करके परिणाम देखें और उसके बाद ही बड़े क्षेत्र में बदलाव करें।



