आलू की उन्नत किस्म कुफरी हिमालिनी ने त्रिपुरा के धलाई जिले में खेत प्रदर्शन के दौरान बेहतर उपज दर्ज की। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) के तकनीकी सहयोग और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), धलाई के मार्गदर्शन में किसान पबिर दास के खेत पर रबी सीजन 2025–26 में इस किस्म का मूल्यांकन किया गया। ICAR की रिपोर्ट के अनुसार, कुफरी हिमालिनी से पारंपरिक रूप से उगाई जा रही कुफरी ज्योति की तुलना में 26.85 प्रतिशत अधिक उपज मिली।
दोनों किस्मों की उपज में कितना अंतर रहा?
धलाई जिले के सलमा गाँव में हुए प्रदर्शन में दर्ज आँकड़े इस प्रकार हैं:
* कुफरी हिमालिनी: 32.60 टन प्रति हेक्टेयर
* कुफरी ज्योति: 25.70 टन प्रति हेक्टेयर
* अतिरिक्त उपज: 6.90 टन प्रति हेक्टेयर
* उपज में वृद्धि: लगभग 26.85 प्रतिशत
रिपोर्ट में पछेती झुलसा रोग का प्रकोप कुफरी हिमालिनी में लगभग 4 प्रतिशत और कुफरी ज्योति में 12 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह संबंधित खेत और मौसम में दर्ज परिणाम है; इसे सभी क्षेत्रों में समान उपज या रोग से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
किसानों के लिए क्या हैं जरूरी सुझाव?
प्रदर्शन में स्वस्थ एवं रोगमुक्त बीज-कंद, उचित जल निकासी, मिट्टी की जाँच के अनुसार संतुलित पोषण, समय पर सिंचाई और रोगों की नियमित निगरानी जैसी कृषि पद्धतियाँ अपनाई गईं। इससे स्पष्ट होता है कि बेहतर परिणाम के लिए किस्म के साथ खेती का वैज्ञानिक प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के किसान कुफरी हिमालिनी अपनाने से पहले अपने कृषि विज्ञान केंद्र से स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूलता की पुष्टि करें। बीज की उपलब्धता, लागत और बाजार की मांग भी जाँचें। बड़े क्षेत्र में बुवाई से पहले छोटे खेत में परीक्षण करना उपयोगी हो सकता है।
स्रोत: ICAR-IARI की रिपोर्ट एवं कृषि विज्ञान केंद्र, धलाई।



