राजस्थान के जयपुर क्षेत्र में चुकंदर की उन्नत किस्म Crimson Globe को लेकर किसानों के खेतों पर किए गए प्रदर्शनों में उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली के सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी असेसमेंट एंड ट्रांसफर (CATAT) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), चोमू (जयपुर-I) के सहयोग से चुकंदर की किस्मों का मूल्यांकन किया गया।
मोरिजा गाँव में कितनी बढ़ी उपज?
ICAR की 28 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रबी सीजन 2025–26 में जयपुर जिले के मोरिजा गाँव में Crimson Globe की खेती करने वाले किसानों ने स्थानीय किस्म की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक उपज दर्ज की। किसानों ने इसकी जड़ों के आकार, बनावट और बाहरी रूप को भी पसंद किया।
यह परिणाम खेतों पर किए गए प्रदर्शन से संबंधित है। इसे सभी क्षेत्रों में समान उपज मिलने की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि उत्पादन मिट्टी, मौसम, सिंचाई, बीज की गुणवत्ता और खेती के प्रबंधन पर निर्भर करता है।
किसानों के लिए क्या है उपयोगिता?
चुकंदर ठंडे मौसम में उगाई जाने वाली सब्जी है। उपयुक्त परिस्थितियों में इसकी खेती फसल विविधीकरण का विकल्प बन सकती है। हालांकि, नई किस्म अपनाने से पहले किसानों को स्थानीय बाजार में मांग, बिक्री भाव, बीज की उपलब्धता, खेती की लागत और संभावित खरीदारों की जानकारी जुटानी चाहिए।
बड़े क्षेत्र में बुवाई करने से पहले नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सलाह लेना उपयोगी रहेगा। किसान छोटे क्षेत्र में परीक्षण करके भी किस्म के प्रदर्शन का आकलन कर सकते हैं।
चुकंदर की खेती में केवल अधिक उपज ही लाभ तय नहीं करती। उत्पादन लागत, परिवहन, गुणवत्ता और बाजार में मिलने वाला भाव भी किसान की वास्तविक कमाई को प्रभावित करते हैं।
स्रोत: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), CATAT और कृषि विज्ञान केंद्र, जयपुर-I की रिपोर्ट।



