उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और मत्स्य आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए मोती संवर्धन योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य मीठे पानी की सीपों से मोती उत्पादन को प्रोत्साहित करना, जल संसाधनों का उपयोग बढ़ाना और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है। वित्तीय वर्ष 2026–27 के राज्य बजट में योजना के लिए ₹3 करोड़ का प्रावधान है।
तीन प्रकार की उत्पादन इकाइयां
सरकार की योजना संबंधी जानकारी के अनुसार, तीन इकाइयां प्रस्तावित हैं:
2,000 सीप: अनुमानित लागत ₹1.50 लाख।
5,000 सीप: अनुमानित लागत ₹3.50 लाख।
15,000 सीप: अनुमानित लागत ₹10 लाख।
इनसे क्रमशः लगभग 2,400, 6,000 और 18,000 मोतियों के उत्पादन का अनुमान दिया गया है। अनुमानित शुद्ध लाभ क्रमशः ₹90,000, ₹2.50 लाख और ₹8 लाख बताया गया है। ये लक्ष्य अनुमान हैं, निश्चित उत्पादन या कमाई की गारंटी नहीं।
परियोजना में कितना देना होगा?
योजना का वित्तीय ढांचा 40% राज्यांश और 60% लाभार्थी अंश पर आधारित है। यानी बताई गई परियोजना लागत में राज्य और लाभार्थी का हिस्सा इसी अनुपात में निर्धारित है। उदाहरण के लिए, ₹1.50 लाख की इकाई में ₹60,000 राज्यांश और ₹90,000 लाभार्थी अंश होगा, यदि पूरी स्वीकृत लागत पर यही अनुपात लागू हो।
कौन कर सकता है आवेदन?
आवेदक के पास निजी तालाब या निजी भूमि पर निर्मित खेत तालाब होना चाहिए। वर्षभर पर्याप्त जलस्तर और एरेशन सिस्टम की व्यवस्था जरूरी है। अनुभव रखने वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जा सकती है। चयनित जिलों, पात्रता और ऑनलाइन आवेदन की वर्तमान स्थिति के लिए उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग या जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क करें।
स्रोत: उत्तर प्रदेश सरकार, मत्स्य विभाग; बजट 2026–27।



