लेट्यूस (Lettuce) एक पत्तेदार सब्जी है, जिसका उपयोग सलाद, सैंडविच और अन्य खाद्य पदार्थों में किया जाता है। होटल, रेस्टोरेंट और शहरी बाजारों में इसकी मांग हो सकती है। किसान इसकी खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार, खरीदारों और उत्पादन लागत का आकलन जरूर करें।
लेट्यूस के लिए कैसी मिट्टी और जलवायु चाहिए?
लेट्यूस ठंडे मौसम में अच्छी बढ़वार करने वाली फसल है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार, लगभग 13–16 डिग्री सेल्सियस औसत तापमान इसके विकास और बेहतर स्वाद के लिए अनुकूल है। अधिक तापमान से पौधों में समय से पहले फूल की डंडी निकल सकती है और पत्तियों का स्वाद कड़वा हो सकता है। अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट या सिल्ट दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है।
बुवाई का सही समय और तरीका
उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में सामान्यतः सितंबर के मध्य से नवंबर के मध्य तक नर्सरी तैयार की जा सकती है। बीजों से पौध तैयार होने में लगभग 4–6 सप्ताह लग सकते हैं। इसके बाद पौधों की खेत में रोपाई करें। सामान्य अनुशंसित दूरी कतार से कतार 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे 30 सेंटीमीटर रखी जाती है। स्थानीय मौसम और किस्म के अनुसार समय में बदलाव संभव है।
सिंचाई और खाद प्रबंधन
रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें। इसके बाद हल्की मिट्टी में लगभग 5–6 दिन और भारी मिट्टी में 8–10 दिन के अंतर पर सिंचाई की जरूरत हो सकती है। मौसम और मिट्टी की नमी देखकर अंतराल तय करें। खेत में जलभराव न होने दें। खाद और उर्वरक का प्रयोग मिट्टी की जांच तथा कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें।
कटाई और बाजार में बिक्री
पत्तेदार किस्मों की विकसित और कोमल पत्तियों की कटाई बाजार योग्य आकार पर की जा सकती है। कटाई के बाद खराब पत्तियां अलग करें और उपज को साफ, उपयुक्त पैकिंग में रखें। बिक्री से पहले स्थानीय मंडी, होटल और रेस्टोरेंट से मांग तथा भाव की जानकारी लें।
किसानों के लिए सलाह: बड़े क्षेत्र में खेती करने से पहले छोटे हिस्से में परीक्षण करें। लागत और लाभ मौसम, किस्म, उपज तथा बिक्री मूल्य पर निर्भर करेंगे।



