उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 22 अक्टूबर 2026 की शाम भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और अन्य किसान नेताओं ने डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान के गेट के बाहर धरना दिया। किसान नेताओं के अनुसार, 23 अक्टूबर को प्रस्तावित किसान बैठक की तैयारियों के लिए वे संस्थान पहुंचे थे, लेकिन गेट बंद होने के कारण आयोजन का सामान परिसर में नहीं ले जा सके। करीब दो से तीन घंटे बाद गेट खोला गया और धरना समाप्त हुआ।
किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, किसान नेताओं ने गन्ने का मूल्य बढ़ाने, बकाया गन्ना भुगतान कराने, धान खरीद केंद्रों को सुचारु रूप से चलाने और विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहीत जमीन का उचित मुआवजा देने की मांग उठाई। गन्ने की तौल में गड़बड़ी, खाद की उपलब्धता और किसानों की अन्य स्थानीय समस्याएं भी किसान संगठनों के एजेंडे में रही हैं।
टिकैत ने धान किसानों को मिलने वाले दाम पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि उन्हें अपेक्षित कीमत से करीब ₹1,000 प्रति क्विंटल कम मिल रहे हैं। यह उनका बयान है; इसे सभी मंडियों का सत्यापित औसत भाव नहीं माना जाना चाहिए।
गन्ना किसानों के लिए यह मुद्दा क्यों अहम है?
गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP), चीनी मिलों से समय पर भुगतान और पुराने बकाये का निपटारा किसानों की आमदनी तथा अगली फसल की तैयारी को प्रभावित करते हैं। किसान अपनी गन्ना पर्चियां, आपूर्ति रिकॉर्ड और भुगतान विवरण सुरक्षित रखें। भुगतान लंबित होने पर संबंधित चीनी मिल, गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से लिखित जानकारी लें।
महत्वपूर्ण: धरना या मांग उठने का अर्थ यह नहीं कि गन्ने का नया मूल्य घोषित हो गया है। मूल्य वृद्धि या भुगतान संबंधी सरकारी निर्णय की पुष्टि आधिकारिक आदेश से ही करें।



