चिया (Salvia hispanica) के बीजों का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में किया जाता है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती रुचि के कारण चिया सीड को नाश्ते, पेय पदार्थों और कुछ बेकरी उत्पादों में जगह मिल रही है। हालांकि, किसानों को इसकी खेती शुरू करने से पहले स्थानीय जलवायु, उत्पादन लागत और खरीदारों की उपलब्धता की जाँच करनी चाहिए।
उपभोक्ताओं को चिया सीड से क्या मिलता है?
चिया सीड में आहार फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड (ALA) पाए जाते हैं। इसमें प्रोटीन और कुछ खनिज भी होते हैं। फाइबर युक्त भोजन सामान्य पाचन और संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है। चिया को पानी या अन्य तरल में भिगोकर, दलिया, दही और कुछ व्यंजनों में मिलाकर खाया जाता है। इसे किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए। सेवन से पहले एलर्जी और व्यक्तिगत आहार संबंधी जरूरतों का ध्यान रखें।
भारत में बाजार की मांग कैसी है?
चिया सीड का उपयोग स्वास्थ्य-केंद्रित खाद्य उत्पादों और कुछ निर्यात बाजारों में होता है। APEDA की जैविक बाजार संबंधी रिपोर्ट में भारत के जैविक चिया उत्पादन और निर्यात के आँकड़े दिए गए हैं। ये पुराने वित्तीय वर्षों के आँकड़े हैं; इन्हें वर्तमान मांग या आज के बाजार भाव का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
किसानों को बुवाई से पहले व्यापारी, प्रसंस्करण इकाई या किसान उत्पादक संगठन (FPO) से खरीद की शर्तें, गुणवत्ता मानक, सफाई, नमी और भुगतान की प्रक्रिया पूछनी चाहिए।
चिया की खेती से पहले जरूरी बातें
ICAR-NIASM के अनुसार, लाइन में बुवाई के लिए लगभग 2 किलोग्राम और छिटकवां बुवाई के लिए 2.5–3 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर बताई गई है। संस्थान ने 1 अगस्त से 15 सितंबर की बुवाई अवधि भी बताई है, लेकिन इसे पूरे भारत के लिए एक समान सलाह न मानें। अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से पुष्टि करें।
किसानों के लिए सलाह: पहली बार सीमित क्षेत्र में परीक्षण करें। संभावित मुनाफे के बजाय वास्तविक लागत, स्थानीय उपयुक्तता और सुनिश्चित खरीदार की जानकारी के आधार पर निर्णय लें।



