कर्नाटक में गन्ना किसानों की मांगों को लेकर जारी आंदोलन के बीच डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर कर्नाटक में किसानों के विरोध-प्रदर्शन से चीनी मिलों में पेराई सत्र शुरू होने में देरी की चिंता सामने आई है।
किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
किसानों के मुद्दों में चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाना, घरेलू उपयोग और व्यावसायिक उपयोग वाली चीनी के लिए अलग मूल्य व्यवस्था पर विचार करना तथा एथेनॉल खरीद नीति की समीक्षा शामिल है। रिपोर्टों में गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की कीमत और गन्ने के मूल्य निर्धारण से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
16 अक्टूबर को जारी 2026-27 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष से संबंधित निविदा में गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए खरीद प्रस्ताव आमंत्रित नहीं किए गए। यह नीति बदलाव चीनी उद्योग और गन्ना उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसके वास्तविक आर्थिक प्रभाव का आकलन उत्पादन लागत, मिलों की स्थिति और वैकल्पिक फीडस्टॉक की उपलब्धता के आधार पर करना होगा।
केंद्र सरकार ने समिति गठित की
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 को सरकार ने पूर्व नीति आयोग सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई। समिति गन्ना किसानों को उचित लाभ, चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य, चीनी रिकवरी की जाँच, तौल में पारदर्शिता और मशीन से कटे गन्ने के वजन में की जाने वाली कटौतियों जैसे मुद्दों की समीक्षा करेगी। समिति की सिफारिशें आने के बाद ही आगे के कदम स्पष्ट होंगे।
किसानों के लिए क्या जरूरी है?
गन्ना किसानों को अपनी चीनी मिल से पेराई कार्यक्रम, तौल पर्ची, रिकवरी संबंधी विवरण और भुगतान की स्थिति की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। किसी भी वजन कटौती या भुगतान विवाद में संबंधित मिल और गन्ना विभाग से लिखित जानकारी लें।
फिलहाल, मूल्य बढ़ाने या नीति बदलने की मांग को अंतिम सरकारी निर्णय न समझें। किसानों को समिति की सिफारिशों और केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।



