उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में ट्राउट मछली पालन के विकास की समीक्षा की गई। भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 18 अक्टूबर 2026 को क्षेत्र का दौरा किया और स्थानीय मछली पालकों से बातचीत की। इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में शीतजल मत्स्यपालन की प्रगति को समझना और इससे जुड़ी आजीविका की संभावनाओं का जायजा लेना था।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से जुड़ा क्लस्टर
भारत सरकार की प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, सचिव ने मुनस्यारी में जौहर मत्स्य स्वायत्त सहकारिता और नमजाला ट्राउट फार्म का दौरा किया। उन्होंने स्थानीय सहकारी संस्थाओं द्वारा रेनबो ट्राउट पालन को आजीविका के विकल्प के रूप में विकसित करने के प्रयासों की सराहना की।
पिथौरागढ़ को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत शीतजल मत्स्यपालन क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस तरह के क्लस्टर का उद्देश्य मत्स्यपालन से जुड़ी गतिविधियों को संगठित करना और उत्पादन, तकनीकी सहायता तथा विपणन के बीच बेहतर तालमेल की संभावनाएँ बढ़ाना है।
नेपाल और ITBP से बाजार जुड़ाव
PIB की विज्ञप्ति के मुताबिक, उत्तराखंड का मत्स्यपालन विभाग नेपाल को ट्राउट की आपूर्ति के लिए निर्यात गतिविधियों से जुड़ा है। राज्य सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत ITBP को भी ट्राउट की आपूर्ति की जा रही है। इससे क्षेत्र में बाजार तक पहुँच के व्यावहारिक उदाहरण सामने आते हैं। हालांकि, इससे हर किसान को निश्चित बिक्री या मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती।
ट्राउट पालन शुरू करने से पहले क्या देखें?
पहाड़ी क्षेत्रों के इच्छुक किसान स्थानीय मत्स्य विभाग या विशेषज्ञ संस्थान से पानी का तापमान, गुणवत्ता और प्रवाह, मछली के बीज की उपलब्धता, चारे की लागत, रोग प्रबंधन और बाजार की मांग की जानकारी लें। सहकारी समिति के जरिए सामूहिक खरीद और बिक्री की संभावनाएँ भी जाँची जा सकती हैं।



