Garlic Farming Tips:लहसुन की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी (pH 6-7) सबसे अच्छी होती है, जिसकी बुवाई अक्टूबर-नवंबर में होती है और कटाई 4-5 महीने बाद होती है, जब पत्तियां पीली पड़ने लगें। खेत की अच्छी तैयारी, रोग-मुक्त कलियों (बीज) का चुनाव, सही दूरी (पौधे से 7.5 सेमी, कतारों में 15 सेमी) और उचित सिंचाई व खाद प्रबंधन (जैसे गोबर की खाद, जैविक उर्वरक) से अच्छी उपज मिलती है।
मिट्टी और खेत की तैयारी
मिट्टी: हल्की से भारी, गहरी, अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है, जिसमें जैविक पदार्थ हों।
तैयारी: खेत की 3-4 बार गहरी जुताई करें, गोबर की खाद (20-25 टन/हेक्टेयर) मिलाएं और समतल करके क्यारियां बनाएं।
बुवाई
समय: सितंबर के अंत से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक या अक्टूबर-नवंबर में करें।
बीज: रोग-मुक्त, अच्छी क्वालिटी की कलियां (Clove) चुनें और बुवाई से पहले थीरम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें।
दूरी: पौधे से पौधे की दूरी 7.5 सेमी और कतारों के बीच 15 सेमी रखें।

खाद और उर्वरक
जैविक: 20-25 टन/हेक्टेयर गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें।
रासायनिक: 10-20-10 (NPK) जैसे उर्वरक का प्रयोग करें या जैविक उर्वरक जैसे एज़ोस्पिरिलम (5 किग्रा/हेक्टेयर) का उपयोग करें, जिसे गोबर की खाद के साथ मिलाएं।
सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
सिंचाई: पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें। बल्ब बनने के समय पर्याप्त नमी बनाए रखें और कटाई से 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें।
खरपतवार: बुवाई के 25-30 दिन बाद पहली और 50-60 दिन बाद दूसरी निराई-गुड़ाई करें।
कटाई और भंडारण
कटाई: फसल 4-5 महीने (130-180 दिन) में तैयार होती है; जब पत्तियां पीली पड़ें, तब खुदाई करें।
सुखाना: खुदाई के बाद 3-4 दिन छाया में सुखाएं, फिर पत्तियों को 2-3 सेमी छोड़कर काट दें।
भंडारण: सूखने के बाद, 70% नमी पर 6-8 महीने तक भंडारित किया जा सकता है; पत्तियों के साथ बंडल बनाकर रखने से नुकसान कम होता है।



