काला नमक धान (Kala Namak Dhan) की खेती सामान्य धान की तरह ही होती है, जिसमें नर्सरी तैयार कर रोपाई की जाती है, लेकिन यह सुगंधित, पौष्टिक और उच्च आय वाला चावल है, जो उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों (सिद्धार्थनगर, बस्ती आदि) में प्रमुखता से उगाया जाता है; इसके लिए उचित समय पर बुवाई (जून के अंत में), सही दूरी (20×15 सेमी), जैविक खाद (जीवामृत), और कीट-रोग प्रबंधन (गंधक कीट के लिए BHC, फंगल के लिए हेक्साकोनाजोल) ज़रूरी है, और कटाई के बाद इसे छाया में सुखाकर, कम पॉलिश करके भंडारित करने से सुगंध बनी रहती है.
खेती की विधि (Farming Method)
समय: नर्सरी के लिए बीज जून के अंतिम सप्ताह में बोएं; रोपाई जुलाई के मध्य या अंत तक करें.
नर्सरी: बीजों को 24-48 घंटे पानी में भिगोकर, जूट के बोरे में अंकुरित करें. शाम को नर्सरी डालें ताकि धूप से पानी गर्म न हो.
रोपाई: 20-30 दिन की पौध को उखाड़कर, कतार से कतार (20 सेमी) और पौधे से पौधे (15 सेमी) की दूरी पर लगाएं. एक जगह 2-3 पौधे लगाएं.
खाद (Fertilizers): बुवाई से पहले फास्फोरस (60 किग्रा) और पोटाश (60 किग्रा) डालें. नाइट्रोजन (120 किग्रा) की आधी मात्रा पहले और बची हुई आधी रोपाई के एक महीने बाद डालें. प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घन जीवामृत का प्रयोग करें.

सिंचाई: सामान्य धान की तरह ही सिंचाई करें, नमी बनाए रखें.
कीट एवं रोग प्रबंधन (Pest & Disease Management)
गंधी कीट: BHC का छिड़काव करें.
पर्ण गलन (Leaf Blight): 0.2% हेक्साकोनाजोल या 1 लीटर प्रोपीकोनाजोल 25 EC का छिड़काव करें.
जस्ता (Zinc) की कमी: 5 किलो जिंक सल्फेट + 25 किलो चूना (500 लीटर पानी में) का छिड़काव करें.
कटाई और भंडारण (Harvesting & Storage)
कटाई का समय: फसल 115-140 दिनों में पकती है; बाली निकलने के 40-45 दिन बाद कटाई करें.
सुखाना: कटाई के 3 दिन के अंदर मड़ाई करें. धूप में सुखाने के बजाय छायादार जगह पर सुखाएं ताकि खुशबू न उड़े.
भंडारण: कम पॉलिश करें (खुशबू छिलके के नीचे होती है) और ठंडी जगह पर रखें.
मुख्य क्षेत्र (Major Areas)
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, महाराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर जैसे जिले और नेपाल का तराई क्षेत्र.
लाभ (Benefits)
उच्च सुगंध, दोगुना प्रोटीन, तीन गुना आयरन, और लो-शुगर.
सही मार्केटिंग होने पर सामान्य धान से अधिक मुनाफा.



