प्याज की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी, सही मौसम (ठंडा और शुष्क), और खेत की तैयारी (गहरी जुताई, जैविक खाद) ज़रूरी है; बुवाई बीज या छोटे कंदों से होती है, जिसमें नर्सरी तैयार कर रोपाई करना एक सामान्य विधि है, और उचित सिंचाई व उर्वरक प्रबंधन (जैसे म्यूरेट ऑफ पोटाश) से अच्छी पैदावार मिलती है.
1. जलवायु और मिट्टी (Climate & Soil)
• जलवायु: ठंडी और शुष्क जलवायु अच्छी होती है; शुरुआती 20°C और बाद में 10-12 घंटे धूप चाहिए.
• मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली, जीवांश युक्त दोमट मिट्टी (pH 6.5-7.5) सर्वोत्तम है, बलुई दोमट मिट्टी भी उपयुक्त है.
2. खेत की तैयारी (Field Preparation)
• पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें, फिर 2-3 बार कल्टीवेटर या हैरो चलाएं.
• खेत को भुरभुरा बनाएं और पाटा लगाएं.
• जैविक खाद: 200-250 क्विंटल/हेक्टेयर गोबर की खाद (उपचारित) या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं.

3. बुवाई का समय और विधि (Sowing Time & Method)
• रबी (सर्दी): सितंबर-अक्टूबर में नर्सरी, नवंबर-दिसंबर में रोपाई.
• खरीफ (बरसात): मई-जून में नर्सरी, जुलाई-अगस्त में रोपाई.
• गर्मी: दिसंबर-जनवरी में नर्सरी, जनवरी-फरवरी में रोपाई.
• विधियाँ:
• सीधे बीज बोना: खेत में बीज छिटक दें (5-5.5 महीने में फसल).
• नर्सरी विधि (सर्वोत्तम): बीज से पौध तैयार कर रोपाई करें.
• बेड विधि: बेड बनाकर बुवाई करें, जल निकासी अच्छी होती है और ड्रिप सिंचाई भी संभव है.
4. उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Management)
• आधार खाद (रोपाई से पहले): 300 किग्रा(सिंगल सुपर फॉस्फेट), 100 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश/हेक्टेयर.
• यूरिया: दो भागों में बांटकर, आधा रोपाई के समय और आधा बाद में दें.
• कॉपर सल्फेट: रोपाई पर 50 किग्रा/हेक्टेयर मिलाने से कंद अच्छे बनते हैं.
5. सिंचाई और देखभाल (Irrigation & Care)
• शुरुआती 45-50 दिन स्प्रिंकलर से, फिर फ्लड इरिगेशन (धोरे बनाकर) कर सकते हैं.
• बेड विधि में ड्रिप सिंचाई का प्रयोग करें.
• फसल को खरपतवार से बचाएं, खासकर बरसात में.



