कपास की तुड़ाई के दौरान खेतों में काम करने वाले श्रमिकों को पौधों के नुकीले हिस्सों से हाथों में चोट लगने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इस जोखिम को कम करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIRCOT), मुंबई ने कपास चुनने वाले श्रमिकों के लिए विशेष सुरक्षात्मक दस्तानों की तकनीक हस्तांतरित करने का समझौता किया है।
यह समझौता चेंगलपट्टू स्थित कंपनी M/s Trust ARS Rubber Private Limited के साथ किया गया है। इसका उद्देश्य दस्तानों की तकनीक को उद्योग तक पहुंचाकर इनके व्यावसायिक उत्पादन और व्यापक उपलब्धता की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है।
नुकीले हिस्सों से हाथों को बचाने में होंगे उपयोगी
ICAR-CIRCOT के अनुसार, इन दस्तानों को कपास की तुड़ाई के दौरान श्रमिकों के हाथों को पौधों पर मौजूद नुकीले सहपत्रों (Bracts) से होने वाली चोटों से बचाने के लिए विकसित किया गया है। इनकी डिजाइन में सुरक्षा के साथ लचीलेपन और आराम का भी ध्यान रखा गया है।
संस्थान के मुताबिक, दस्ताने दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं और इनका निर्माण खेतों में बार-बार उपयोग की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है। इससे श्रमिकों को तुड़ाई के दौरान हाथों की सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।
किसानों और श्रमिकों के लिए क्यों अहम है यह पहल?
कपास की तुड़ाई में श्रमिकों के हाथों का लगातार उपयोग होता है। हाथों में चोट लगने से काम करने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में उपयुक्त सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल श्रमिकों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है।
हालांकि, किसानों और श्रमिकों को इन दस्तानों की बाजार में उपलब्धता और कीमत की जानकारी संबंधित निर्माता या विक्रेता से प्राप्त करनी होगी। खरीदने से पहले दस्तानों का सही आकार, पकड़, आराम और तुड़ाई के दौरान काम करने में आसानी जांचना भी जरूरी है।
यह पहल कपास उत्पादन से जुड़े श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कृषि अनुसंधान और उद्योग के सहयोग का उदाहरण है।



