उत्तर प्रदेश में सरकारी खरीद केंद्र पर धान बेचने से पहले किसानों को फसल की नमी और गुणवत्ता मानकों का ध्यान रखना चाहिए। निर्धारित मानकों से अधिक नमी या गुणवत्ता में कमी होने पर खरीद प्रभावित हो सकती है। सामान्य सरकारी धान खरीद विनिर्देशों में अधिकतम 17 प्रतिशत नमी का मानक मिलता है। हालांकि, किसान अपने केंद्र पर खरीफ विपणन सत्र 2026–27 के लिए लागू आधिकारिक गुणवत्ता निर्देशों की पुष्टि अवश्य करें।
नमी अधिक बताने पर किसान क्या करें?
1. जाँच की जानकारी लें: केंद्र कर्मचारी से पूछें कि धान के नमूने की नमी किस प्रक्रिया से मापी गई और रीडिंग कितनी आई।
2. दोबारा परीक्षण का अनुरोध करें: रीडिंग पर संदेह हो तो केंद्र प्रभारी से दोबारा जाँच कराने का अनुरोध करें। संभव हो तो लिखित कारण या उपलब्ध जाँच विवरण लें।
3. धान को ठीक से सुखाएँ: नमी अधिक होने पर साफ तिरपाल पर धान फैलाकर उपयुक्त मौसम में सुखाएँ। उसे मिट्टी, बारिश और बाहरी गंदगी से बचाएँ। दोबारा नमी जाँचने के बाद ही केंद्र ले जाएँ।
4. जरूरी रिकॉर्ड रखें: किसान पंजीकरण, टोकन, खरीद केंद्र का नाम, तारीख, नमी की रीडिंग और उपलब्ध पर्ची या संदेश सुरक्षित रखें।
5. शिकायत कहाँ करें? समस्या हल न होने पर केंद्र प्रभारी और संबंधित जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी से संपर्क करें। शिकायत में तारीख, केंद्र का नाम और उपलब्ध दस्तावेज शामिल करें।
किसानों के लिए जरूरी सावधानी
धान की गुणवत्ता में नमी के अलावा अन्य मानक भी लागू हो सकते हैं। इसलिए हर अस्वीकृति को गलत न मानें; पहले जाँच और संबंधित नियम समझें। यदि केंद्र पर लागू मानक स्पष्ट न हों, तो जिला खाद्य एवं विपणन कार्यालय से जानकारी लें।



