8 जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने विकसित भारत संकल्प यात्रा के किसान लाभार्थियों के साथ वार्ता में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि विकसित भारत संकल्प यात्रा का सबसे बड़ा मकसद है- कोई भी हकदार, सरकारी योजना के लाभ से छूटना नहीं चाहिए। कई बार जागरूकता की कमी से, कई बार दूसरे कारणों से कुछ लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे लोगों तक पहुंचना हमारी सरकार अपना दायित्व समझती है। इसलिए ये मोदी की गारंटी की गाड़ी गांव-गांव जा रही है। जबसे ये यात्रा शुरु हुई है तब से लगभग 12 लाख नए लाभार्थियों ने उज्ज्वला के मुफ्त गैस कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। कुछ दिन पहले जब मैं अयोध्या में था, वहां उज्ज्वला की 10 करोड़वीं लाभार्थी बहन के घर गया था। इसके अलावा सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम स्वनिधि के लिए भी इस यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं।

विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान 2 करोड़ से ज्यादा गरीबों के स्वास्थ्य की जांच हुई है। इसी समय में एक करोड़ लोगों की टीबी की बीमारी की भी जांच हुई है, 22 लाख लोगों की सिकल सेल अनीमिया की जांच हुई है। आखिर ये सारे लाभार्थी भाई-बहन, ये कौन लोग हैं? ये सारे लोग गांव-गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी समाज के लोग हैं, जिनके लिए डॉक्टर तक पहुंचना पहले की सरकारों में एक बहुत बड़ी चुनौती रही है। आज डॉक्टर मौके पर ही उनकी जांच कर रहे हैं। और एक बार उनकी शुरुआती जांच हो गई तो उसके बाद आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज तो है ही। किडनी के मरीज़ों के लिए मुफ्त डायलिसिस की सुविधा और जन औषधि केंद्रों पर सस्ती दवाएं भी उनके लिए आज उपलब्ध हैं। देशभर में बन रहे आयुष्मान आरोग्य मंदिर, ये तो गांव और गरीब के लिए आरोग्य के बहुत बड़े केंद्र बन चुके हैं। यानि विकसित भारत संकल्प यात्रा, गरीब के स्वास्थ्य के लिए भी एक वरदान साबित हुई है।

मुझे खुशी है कि सरकार के इन प्रयासों का बहुत बड़ा लाभ हमारी करोड़ों माताओं-बहनों को मिल रहा है। आज महिलाएं खुद आगे आकर नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। पहले ऐसी अनेक बहनें थीं, जिनके पास सिलाई-कढ़ाई-बुनाई जैसी कोई न कोई स्किल थी, लेकिन उनके पास अपना काम शुरु करने के लिए कोई साधन नहीं था। मुद्रा योजना ने उन्हें अपने सपने पूरे करने का भरोसा दिया है, मोदी की गारंटी है। आज गांव-गांव में रोजगार-स्वरोजगार इसके नए मौके बन रहे हैं। आज कोई बैंक मित्र है, कोई पशु सखी है, कोई आशा-।छड-आंगनबाड़ी में है। बीते 10 वर्षों में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स से 10 करोड़ बहनें जुड़ चुकी हैं। इन बहनों को साढ़े 7 लाख करोड़ रुपए से अधिक की मदद दी जा चुकी है। इसमें अनेक बहनें बीते वर्षों में लखपति दीदी बनी हैं। और इस सफलता को 
देखते हुए ही मैंने सपना संजोया है, मैंने सपना संकल्प के रूप में देखा है और हमने तय किया है कि दो करोड़, आंकड़ा बहुत बड़ा है। दो करोड़ लखपति दीदी मुझे बनाना है। आप विचार कीजिए लखपति दीदी की संख्या दो करोड़ हो जाएगी कितनी बड़ी क्रांति हो जाएगी। सरकार ने नमो ड्रोन दीदी योजना भी शुरु की है। मुझे बताया गया है कि विकसित संकल्प यात्रा के दौरान लगभग 1 लाख ड्रोंस का प्रदर्शन किया गया है। देश के इतिहास में पहली बार किसी टेक्नॉलॉजी से इस प्रकार मिशन मोड पर जनता को जोड़ा जा रहा है। अभी तो कृषि क्षेत्र में ही ड्रोन के उपयोग के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। लेकिन आने वाले दिनों में इसका दायरा दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ने वाला है।
हमारे देश में किसानों को लेकर, कृषि नीति को लेकर जो चर्चाएं होती हैं, पहले की सरकारों में उसका दायरा भी बहुत सीमित था। किसान के सशक्तिकरण की चर्चा सिर्फ पैदावार और उपज की बिक्री के इर्दगिर्द तक सीमित रही। जबकि किसान को अपने दैनिक जीवन में भांति-भांति की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमारी सरकार ने किसान की हर मुश्किल को आसान करने के लिए चौतरफा प्रयास किए। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से हर किसान को कम से कम 30 हजार रुपए दिए जा चुके हैं। छोटे किसानों को मुसीबतों से बाहर निकालने के लिए हम निरंतर काम कर रहे हैं। कृषि में सहकारिता को बढ़ावा देना, ये इसी सोच का परिणाम है। च्।ब्ै हों, थ्च्व् हों, छोटे किसानों के ऐसे संगठन आज बहुत बड़ी आर्थिक ताकत बनते जा रहे हैं। भंडारण की सुविधा से लेकर फूड प्रोसेसिंग उद्योग तक किसानों के ऐसे अनेक सहकारी संगठनों को हम आगे ला रहे हैं। कुछ दिन पहले सरकार ने दाल किसानों के लिए भी, पल्सेज की जो खेती करते हैं उनके लिए एक बहुत बड़ा निर्णय लिया है। अब दाल पैदा करने वाले किसान जो दाल किसान हैं, वो ऑनलाइन भी सीधे सरकार को दालें बेच पाएंगे। इसमें दाल किसानों को डैच् पर खरीद की गारंटी तो मिलेगी ही, साथ ही बाज़ार में भी बेहतर दाम सुनिश्चित होंगे। अभी ये सुविधा तूर या अरहर दाल के लिए दी गई है। लेकिन आने वाले समय में दूसरी दालों के लिए भी इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। हमारा प्रयास है कि दाल खरीदने के लिए जो पैसा हम विदेश भेजते हैं, वो देश के ही किसानों को मिल सके। 
विकसित भारत संकल्प यात्रा में साथ जा रहे इस काम को संभालने वाले सभी कर्मचारियों की भी मैं प्रशंसा करूंगा। कई स्थानों पर ठंड बढ़ रही है, कई स्थानों पर बारिश हो रही है, कठिनाईयां भी आती हैं। लेकिन इन सबके बावजूद, स्थानीय प्रशासन के लोग और बड़े-बड़े अधिकारी भी पूरी निष्ठा से इस संकल्प यात्रा का लाभ अधिकतम लोगों को मिले, लोगों की जिंदगी बेहतर हो, इसके लिए काम कर रहे हैं। अपने कर्तव्य का ऐसे ही पालन करते हुए हमें आगे बढ़ना है, देश को विकसित बनाना है। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनायें! और जिन-जिन लोगों से मुझे संवाद करने का मौका मिला, अनेक पहलू मुझे समझने को मिले और उनका आत्मविश्वास देखा, उनकी बातों में संकल्प नजर आया। ये वाकई भारत के सामान्य मानवीय का जो सामर्थ्य है, जो सामर्थ्य देश को आगे ले जाने वाला है, इसकी अनुभूति हो रही है। ये हम सबका सौभाग्य है कि आज देश का जन-जन भारत को 2047 में विकसित भारत बनाने के मिजाज से काम कर रहा है। बहुत खुशी हुई आपसे मिलकर के और विकसित यात्रा के साथ फिर एक बार जुड़ने का मौका मिलेगा, तब जरूर मिलेंगे।
हमें अपने गुरुओं की सलाह के अनुसार खेती करनी चाहिए और धरती माता की रक्षा करनी चाहिए। गुरु नानक देवजी की शिक्षाओं से परे कुछ भी नहीं है।
पंजाब के गुरदासपुर के गुरविंदर सिंह बाजवा से वार्ता
पंजाब के गुरदासपुर के गुरविंदर सिंह बाजवा ने प्रधानमंत्री जी को बताया कि विकसित भारत यात्रा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कृषि क्षेत्र में सर्वाेत्तम संभवित लाभ पाने के लिए किसान छोटे समूहों में संगठित हो गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि उनका किसानों का समूह हर प्रकार के दुष्प्रभाव से मुक्त खेती पर काम कर रहा है और इसके लिए उन्हें मशीनरी पर सब्सिडी भी मिली है। इससे छोटे किसानों को पराली प्रबंधन और मिट्टी के स्वास्थ्य में भी मदद मिली। श्री बाजवा ने सरकार के सहयोग से गुरदासपुर में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आने की जानकारी दी। क्षेत्र में एफपीओ संबंधी गतिविधियां भी चल रही हैं। कस्टम हायरिंग योजना से 50 किमी के दायरे में छोटे किसानों को मदद मिल रही है।
श्री बजावा ने कहा, ‘अब किसान को लग रहा है कि उसे उचित समर्थन मिलेगा।’ जब उन्होंने प्रधानमंत्री जी को बताया कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’ से बहुत उम्मीदें हैं, तो प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि यह इसलिए संभव है, क्योंकि किसान उनके अनुरोध को सुनते हैं। प्रधानमंत्री ने टिकाऊ खेती के लिए अपना अनुरोध दोहराया। प्रधानमंत्री जी ने कहा, “हमें अपने गुरुओं की सलाह के अनुसार खेती करनी चाहिए औरधरती मां की रक्षा करनी चाहिए। खेती के क्षेत्र में गुरु नानक देवजी की शिक्षाओं से परे कुछ भी नहीं है।श्श् विकसित भारत संकल्प यात्रा के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, “हर अंतिम लाभार्थी के पास पहुंचने तक श्मोदी की गारंटी की गाड़ीश् नहीं रुकेगी।’’



