Sarson ki Kheti Kaise Karen: सरसों की खेती किसानों के लिए सोने की खान साबित हो सकती है. सिर्फ 15-20 हज़ार की लागत में एक एकड़ से 50 हज़ार से 1 लाख तक कमाई.. सही बुवाई, उन्नत बीज और थोड़ी देखभाल बस, ये आपकी जेब में हरे-हरे नोट की बारिश करेगी.

कई अन्य फसलों के मुकाबले सरसों की खेती में खर्चा कम आता है. एक एकड़ खेती में मात्र 1-2 किलो बीज की ज़रूरत पड़ती है. बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी सब मिलाकर ज्यादा से ज्यादा प्रति एकड़ (Mustard farming cost and profit) खर्चा 15-20 हज़ार रु. तक आता है. अगर आपने उन्नत किस्म के बीजों का प्रयोग किया तो प्रति एकड़ लागत 10 से 15 क्विंटल उपज़ होगी. आमतौर पर बाज़ार में सरसों का प्रति क्विंटल दाम 4,500 से लेकर 7 हज़ार रु. होता है. तो इस हिसाब से में मुनाफा 50 हज़ार से एक लाख तक पहुंच सकता है.
किसान हैप्पी सिंह बताते हैं कि सरसों की फसल बोने के बाद लगभग 90 से 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. यानी अगर किसान सितंबर-अक्टूबर में बुवाई करते हैं तो फरवरी-मार्च तक सरसों की फसल हाथ आती है. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सरसों की बुवाई का सही समय सितंबर से अक्टूबर के अंत तक माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 10 से 20 अक्टूबर के बीच बुवाई करने पर बेहतर उपज मिलती है और रोगों का खतरा भी कम रहता है. ऊंचाई वाले इलाकों में नवंबर से दिसंबर के पहले सप्ताह तक भी बुवाई की जा सकती है.



