यूपी में किसानों के लिए अपनी ही फसल को अच्छी कीमत के लिए राज्य से बाहर बेच पाना आसान नहीं था, लेकिन अब ये संभव है। अब उत्तर प्रदेश के किसान अपने राज्य के साथ साथ दूसरे राज्यों में भी अपने कृषि उत्पाद बेच पाएंगे। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य के किसानों को दूसरे राज्यों में अपने उत्पाद बेचने का मौका देने के लिये मंडी नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया कि अभी तक जो किसान उत्तर प्रदेश से बाहर अपना माल नहीं बेच सकते थे; उन्हें इजाजत देने के लिए और खासतौर से उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए मंडी उत्पादन 28वां संशोधन-2023 को अमल में लाने के संबंध में प्रस्ताव आया था, जिस पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है।
उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम, 1964 को संशोधित करके मंडी उत्पादन 28वां संशोधन-2023 किया गया है। जिसके मुताबिक, राज्य के बाहर से लाए गए कृषि उत्पाद को यहां के प्रोसेसिंग यूनिट्स खरीद सकती हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश के किसान कहीं भी अपने कृषि उत्पाद को बेच सकेंगे। इस संशोधन से नई प्रसंस्करण इकाइयां बनेंगी, जिससे यहां के किसानों को भी फायदा होगा। इससे पहले केंद्र सरकार ने भी किसानों को अपनी फसल अपने राज्य से बाहर बेचने के लिए ई-नाम के तहत प्लेटफॉर्म ऑफ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी।

सरकार का मानना है कि पीओपी के शुरू होने से किसानों को उपज राज्य की सीमाओं से बाहर बेचने में सुविधा होगी। इस सुविधा से कई बाजारों, खरीददारों, सर्विस प्रोवाइडर्स तक किसानों की डिजिटल रूप से पहुंच बढ़ती है और उनकी उपज की सही कीमत मिलती है। यही नहीं इससे बिजनेस लेन-देन में पारदर्शिता भी आती है। कृषि गणना वर्ष 2010-11 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 233.25 लाख किसान हैं, जो लगभग 165.98 लाख हेक्टेयर (68.7 प्रतिशत) क्षेत्र में खेती करते हैं। यूपी में गेहूं, चावल, दाल, तेल बीज और आलू यहां के प्रमुख कृषि उत्पाद हैं। राज्य की सबसे महत्वपूर्ण नकद फसल गन्ना है। बागवानी के लिये ये राज्य देश में सबसे महत्वपूर्ण है। यहां आमों का भी उत्पादन बहुतायत में किया जाता है।



